हाल ही में गाजियाबाद में घटित एक अत्यंत हृदयविदारक घटना, जिसमें तीन नाबालिग बहनों की असमय मृत्यु हो गई, ने पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया है। यह घटना केवल एक समाचार नहीं, बल्कि एक गंभीर चेतावनी है—कि आज के समय में बच्चों पर बढ़ता मानसिक दबाव, मोबाइल और ऑनलाइन दुनिया का अत्यधिक प्रभाव तथा भावनात्मक संवाद की कमी कितनी भयावह स्थिति उत्पन्न कर सकती है। यह हम सभी के लिए आत्म-मंथन का विषय है।
इसी गहन संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी को ध्यान में रखते हुए आज हमारे विद्यालय एन आर पब्लिक स्कूल में प्रबंधक एवं शिक्षकों के संयुक्त प्रयास से विद्यार्थियों के लिए एक विशेष मेडिटेशन एवं मोटिवेशन सत्र का आयोजन किया गया। इस सत्र का उद्देश्य बच्चों को डराना नहीं, बल्कि उन्हें जीवन की वास्तविकताओं से परिचित कराते हुए मानसिक रूप से मजबूत, जागरूक और आत्मविश्वासी बनाना था।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को सरल और सहज शब्दों में समझाया गया कि जीवन में आने वाली कठिनाइयाँ, माता-पिता या शिक्षकों की डांट, परीक्षा का दबाव या किसी व्यक्तिगत उलझन से घबराने की आवश्यकता नहीं है। ये परिस्थितियाँ स्थायी नहीं होतीं, बल्कि हमें बेहतर और मजबूत बनाने के लिए आती हैं। बच्चों को यह संदेश दिया गया कि किसी भी समस्या को अकेले सहने के बजाय अपने माता-पिता, शिक्षक या विश्वसनीय व्यक्ति से खुलकर बात करना ही सबसे सही और सुरक्षित मार्ग है।
मेडिटेशन सत्र के अंतर्गत विद्यार्थियों से “ॐ” का सामूहिक जाप कराया गया, जिससे वे अपने मन को शांत करना, नकारात्मक विचारों से दूरी बनाना और स्वयं से जुड़ना सीख सकें। उन्हें यह समझाया गया कि जब मन शांत होता है, तो सोच स्पष्ट होती है, समस्याएँ छोटी लगने लगती हैं और गलत निर्णय लेने की संभावना स्वतः कम हो जाती है।
इस अवसर पर विद्यालय के प्रबंधक महोदय ने एक प्रेरक कहानी के माध्यम से विद्यार्थियों को यह सिखाया कि अनुशासन, आत्म-नियंत्रण और निरंतर प्रयास से जीवन की सबसे कठिन परिस्थितियों को भी बदला जा सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि चुनौतियों से भागना समाधान नहीं है, बल्कि उनका साहस और धैर्य के साथ सामना करना ही सच्ची सफलता और आत्मबल का प्रतीक है।
यह सत्र विद्यार्थियों के लिए न केवल प्रेरणादायक रहा, बल्कि आत्म-चिंतन, सकारात्मक सोच और जीवन के प्रति जिम्मेदार दृष्टिकोण विकसित करने में भी सहायक सिद्ध हुआ। विद्यालय परिवार का यह प्रयास बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य की दिशा में एक सराहनीय कदम है।